डीआरडीओ से मिले रायपुर को तीसरी लेहेर से लड़ने के लिए 300 ऑक्सीजन सिलेंडर, मिले 8.5 करोड़ रुपए

CHATTISGARH HEALTH NATIONAL

रायपुर| छत्तीसगढ़ में कोरोना की स्तिथि फ़िलहाल राहत भरी जरूर है, लेकिन महाराष्ट्र से राज्य की सीमाएं जुड़ी हुई हैं| जहां फ़िलहाल धारा 144 लागू है,क्योंकि संक्रमण की तीसरी लहर दस्तक दे चुकी हैं| छत्तीसगढ़ में तीसरी लहर के हिसाब से मदद मिलनी शुरू हो गई है। पीएम केयर फंड से सबसे पहले भारतीय रक्षा अनुसंधान (डीआरडीओ) में तैयार किए गए 300 से अधिक ऑक्सीजन सिलेंडर रायपुर को मिल गए हैं। यही नहीं, प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग से रायपुर को तीसरी लहर के निपटने के लिए 8.5 करोड़ रुपए का फंड मंजूर हुआ है। जिले से एक्शन प्लान भी मांगा गया है कि यह रकम किस तरह खर्च की जाए, ताकि कोरोना के इलाज से जुड़े संसाधन जुटाए जा सकें। प्रदेश में तीसरी लहर से मुकाबले का एक्शन प्लान और रणनीति तैयार हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों से बिंदुवार जरूरतें और प्लान मांगा था। अब इस हिसाब से फंड का आवंटन शुरू कर दिया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश में तीसरी लहर की तैयारी के लिए आरंभिक रूप से करीब 300 करोड़ रुपए के खर्च का अनुमान लगाया है। यह रकम जिलों को इलाज के लिए संसाधन जुटाने में मददगार होगी। कॉरपोरेट सेक्टर से भी मदद के लिए जो संसाधन मिल रहे हैं, वह अलग से जिलों में भेजे जाएंगे। चूंकि रायपुर प्रदेश में इलाज का केंद्र है इसलिए यहीं सबसे पहले मदद पहुंची है। प्रदेश में तीसरी लहर के मद्देनजर 100 से अधिक ऑक्सीजन प्लांट बनाने का काम भी 80 फीसदी से अधिक पूरा हो चुका है।

प्रदेश के 28 जिलों में 13203 से अधिक अतिरिक्त बिस्तरों की व्यवस्था बनाई जा रही है, जिसमें से 6589 से अधिक बेड ऑक्सीजन वाले होंगे। इसके अलावा दूसरी लहर के अंत तक 32 हजार बेड का इंतजाम किया जा चुका था, जिसमें नए बेड और जुड़ेंगे। 918 से अधिक अतिरिक्त वेंटिलेटर लगे हैं जिलों में। 350 वेंटिलेटर की व्यवस्था बच्चों के लिए की जा रही है।

कहा- जैसी जरूरत मिलेगा फंड

कोरोना कोर कमेटी के असेसमेंट के मुताबिक प्रदेश में अगर कोरोना के केस बढ़ते भी हैं, तो दवाइयों वगैरह का बंदोबस्त नवंबर तक के लिए है। एंटीजन जांच हर जगह हो सके, इसके लिए पर्याप्त किट की व्यवस्था भी हो रही है। तीसरी लहर के पहले ही हेल्थ वर्करों को गांव गांव में टेस्ट करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटीजन, आरटीपीसीआर और ट्रूनेट तीनों तरह के टेस्ट की व्यवस्था रहेगी। मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार- डॉ. सुभाष मिश्रा, डायरेक्टर, एपिडेमिक कंट्रोल ने कहा, तीसरी लहर की चुनौती से निपटने के लिए जिलों में फंड या बजट की कमी नहीं होगी। जरूरत के हिसाब से हर जिले को पर्याप्त मात्रा में बजट और संसाधन मिल सकें, इसका बंदोबस्त किया गया है।

कर रहें हैं तैयारी

मिली जानकारी में डॉ. मीरा बघेल,सीएमओ, रायपुर ने कहा है, रायपुर को साढ़े 8 करोड़ रुपए मिले हैं। इसके अनुरूप प्लान तैयार कर रहे हैं। ग्रामीण स्तर पर भी मरीजों को टेस्ट, इलाज और दवाएं मिल सकें इसके लिए पर्याप्त बंदोबस्त किया जा रहा है।

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