बिलासपुर के बाज़ारों में गणेश चतुर्थी को लेकर दिखी रौनक, नारियल के खोल और कपिल शो के थीम पर बनी प्रतिमाएं

CHATTISGARH RELIGIOUS STATE

बिलासपुर| लोगों की आस्था से जुड़ा हर्षोउल्लास से मनाया जाने वाला त्यौहार गणेश चतुर्थी, जिसकी शुरुआत 10 सितंबर से होने जा रही है। इस दिन भगवान गणेश शुभ मुहूर्त पर घरों के साथ ही पंडालों में भी विराजेंगे। हालांकि सार्वजनिक उत्सव में श्रद्वालुओं को कोरोना गाइड लाइन का पालन करना होगा। पर्व को लेकर बाजार में अभी से रौनक देखी जा रही है। वहां अलग-अलग तरह की गणेश भगवान की प्रतिमाएं मिल रहीं है।

बाजारों में इस बार मिट्टी से बने गणेश भगवान की मूर्तियां ही बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों पर इस बार रोक है। हालांकि पिछले वर्षों के मुकाबले व्यापार थोड़ा कोरोना की वजह से ठंडा दिखाई दे रहा है। अधिकतर गली मोहल्लों में इस बार मूर्ति स्थापित नहीं की जा रही है।


रेलवे कॉलोनी स्थित मशहूर गणेश मंदिर में भी रौनक

बिलासपुर की एक मात्र काली गणेश भगवान की मूर्ति रेलवे कॉलोनी स्थित मंदिर में है। यह मंदिर दक्षिण भारतीय शैली में 70 साल पहले मद्रास से आए लोगो ने बनवाया था। मंदिर के पुजारी आर. के. एयर ने बताया की मंदिर की साफ सफाई चल रही है। मंदिर के ट्रस्टी बी. कृष्णा ने बताया कि गणेश चतुर्थी पर भव्य आरती का आयोजन किया जाएगा।

कपिल शर्मा थीम और नारियल से बने गणेश

भारत में मूर्ति कलाकारों के रचनात्मकता की कोई कमी नहीं है, गणेशोस्तव में जिस तरह भगवान गणेश की मूर्तिओं को तैयार किया जाता है उससे यह साफ मालूम पड़ता है| बिलासपुर के भेचेंद्र पांडे (50 वर्षीय) पिछले 20 साल से नारियल के गणेश बना रहे है। 2011 में उनका भीषण एक्सीडेंट हुआ था जिसकी वजह वह लंबे समय तक कोमा में चले गए थे। उसके बाद से उनका अधिकतर समय अपने घर पर ही अलग अलग भगवान की मूर्ति बनाते बीतता है।


इस साल यह भी देखने को मिला की चुचुहियापारा के रहने वाले मूर्तिकार ने कपिल शर्मा शो के थीम पर भी मूर्तियों का निर्माण किया है। जिसकी बिलासपुर शहर में खासी चर्चा भी है।

मूर्ति स्थापना, विसर्जन व उसके बाद किसी भी प्रकार के भोज भंडारा जगराता, सांस्कृतिक कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं होगी। केवल हाथ से बजाए जाने वाले कम ध्वनि वाले वादय यंत्रव सुप्रीम कोर्ट के गाइड लाइन अनुसार लाउड स्पीकर का उपयोग किया जा सकेगा मूर्ति आगमन व विसर्जन के दौरान ध्वनि विस्तारक यंत्र धुमाल और डीजे बजाने की अनुमति नहीं होगी।

मूर्ति आगमन व विसर्जन के दौरान प्रसाद चरणांमृत, खाद्य व पेय पदार्थ के वितरण की अनुमति नहीं होगी । मूर्ति विसर्जन के लिए एक लाईट वाहन की अनुमति रहेगी बड़े वाहन पूणर्त: प्रतिबंधित रहेंगे । विसर्जन वाहन में अतिरिक्त साज सज्जा झांकी की अनुमति नहीं होगी। मूर्ति विसर्जन में 10 लोग ही शामिल हो सकेंगे। जो मूर्ति के साथ ही वाहन में बैठेंगे।

महिलाएं आज के दिन कडू भात की परंपरा को निभाएंगी और कल (9 सितंबर) को तीज पर्व मनाया जाएगा| इस दिन महिलाए अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती है। बाजारों में इसे लेकर भी लोग खरीदारी करते नजर आ रहे है। मूर्तिकारों और रेड़ी वालों से लोग लक्ष्मी,पार्वती और महादेव की मूर्ति खरीदते दिखाई दे रहे है।

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