छत्तीसगढ़ के जगदलपुर शहर में स्थित लगभग 400 साल पुराना दलपत सागर गुरुवार की रात दीयों की रोशनी से जगमगा उठा। कलेक्टर रजत बंसल, IG सुंदरराज पी समते SP जीतेंद्र सिंह मीणा ने शहरवासियों के साथ मिलकर यहां एक साथ 80 हजार से ज्यादा दीये जलाए हैं। वहीं गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी इसे दर्ज कराया जाएगा। दलपत सागर के जीर्णोद्धार के बाद पहली बार इस तरह का भव्य आयोजन किया गया है। जिसमें शहर के हर वर्ग के लोग शामिल होने पहुंचे थे।

कलेक्टर रजत बंसल ने बताया कि, मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार दलपत सागर को 3 चरणों में बनाने का काम कर रहे हैं। जिनमें पहले चरण का उद्घाटन भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कर चुके हैं। दलपत सागर के जीर्णोद्धार का काम तेजी से चल रहा है। नगर निगम, सामाजिक संस्थानों और शहरवासियों ने मिलकर टारगेट रखा था कि दलपत सागर में 51 हजार दीये जलाएंगे। लेकिन खुशी इस बात की है कि यहां टारगेट से ज्यादा 80 हजार से ज्यादा दीये जलाए गए हैं। दलपत सागर का काम पूरा होने के बाद गंगामुंडा तालाब का भी जीर्णोद्धार किया जाएगा।

राजा दलपत देव ने करवाया था तालाब का निर्माण

लगभग 400 साल पहले राजा दलपत देव द्वारा दलपत सागर का निर्माण करवाया गया था। लेकिन गुजरते समय के साथ दलपत सागर में गंदगी पसरने लगी थी। उपेक्षाओं का दंश झेल रहे ऐतिहासिक दलपत सागर की स्थित को देख 5 नवंबर 2019 को शहर के जागरूक लोगों ने इसे फिर से संवारने की जिम्मेदारी उठाई। सुबह 5 बजे से 9 बजे तक तो कभी कभी दोपहर 3 बजे तक लोग निस्स्वार्थ भाव से दलपत सागर की सफाई करने पहुंचे थे। लगभग 125 दिन में सैकड़ों ट्रक जलकुंभियों और कचरों को तालाब से निकाला गया और सफाई की गई।

शहरवासियों ने कहा-दलपत सागर में बसती है हमारी आत्मा

शहर के लोगों ने कहा कि बचपन से ही हम इस तालाब के किनारे खेलकूद कर बड़े हुए हैं। तालाब में हम नहाया करते थे। लेकिन अब यहां का पानी गंदा हो गया था। इस पानी का उपयोग करने से चर्म रोग भी होने लगा था। दलपत सागर में हमारी आत्मा बसती है, इस लिए इसकी साफ-सफाई का हमने बीड़ा उठाया था। हमने एक टीम बनाई और काम में जुट गए थे। फिर प्रशासन का भी सहयोग मिला। उपेक्षा का दंश झेल रहे दलपत सागर को हमने एक बार फिर से उसके पुराने रूप में ला दिया है।

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