80 के दशक में पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आए 14 लोगों को भारत की नागरिकता मिली है। कलेक्टर ने जैसे ही उन्हें भारतीय नागरिकता का प्रमाणपत्र दिया तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक आए। नागरिकता पाने वालों में कई ऐसे लोग हैं जो आए तो थे बचपन में, लेकिन अब तक भारतीय नहीं कहे जा रहे थे। उनका कहना है कि अब वह भी भारतीय हैं और उन्हें भी अन्य भारतीयों की तरह सारे अधिकार मिल सकेंगे।

कलेक्ट्रेट से मिली जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान के सिंध प्रांत के सक्खर जिले के रोड़ी शहर से आई तीन बहनों का भारतीय नागरिकता का सपना साकार हुआ। उन्होंने बताया कि जब वह भारत आई थी तो 10 साल से भी कम उम्र की थीं। आज वे उम्र के 40वें दशक में हैं तब उन्हें नागरिकता मिल पाई है। इन बहनों के भाई विनोद माखीजा ने कहा कि आज का दिन उनके लिए किसी त्यौहार से कम नहीं है।

कलेक्टर को मिला अधिकार, तब हुआ सपना साकार

इन लोगों ने बताया कि भारत की नागरिकता पाने के लिए वह लोग सालों से भारत सरकार से गुहार लगा रहे थे। इस कार्य में शदाणी दरबार ने उनकी काफी मदद की। उनका सपना आज तब साकार हुआ है, जब कलेक्टर को स्थानीय स्तर पर जांच के बाद नागरिकता देने का अधिकार केंद्र सरकार की ओर से दिया गया। जैसे ही उन्होंने दुर्ग कलेक्टर के पास नागरिकता के ले आवेदन दिया, डिप्टी कलेक्टर खेमलाल वर्मा ने तीन महीनों में प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट कलेक्टर को दी। इसके बाद कलेक्टर ने 13 नवंबर को 14 लोगों को भारत की नागरिकता का प्रमाण पत्र सौंपा।

43 साल बाद मिली नागरिकता

ऋषि कुमार 12 साल की उम्र में अपने माता पिता और 5 साल की बहन सलोचनी बाई के साथ सिंध से भारत आए थे। जब उनके दोस्त मतदान करने जाते तो वह सोचा करते थे जब भी उन्हें यह अधिकार मिलेगा तो वह भी अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। 43 साल बाद उनका यह सपना पूरा हुआ। ऋषि कुमार को 55 साल की उम्र में भारतीय नागरिकता मिली। नागरिकता लंबित होने की वजह से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब दिक्कत दूर हो चुकी हैं। ऋषि कुमार की बहन सलोचनी बाई को भी भारत की नागरिकता मिल गई है। दोनों भाई खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं।

By Desk

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