महंत नरेंद्र गिरी की मौत की पहलु सुलझाने में भिड़ी सीबीआई, गठित हुई 6 सदस्यों की टीम

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प्रयागराज| अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि की मौत की जाँच सीबीआई ने अपने हांथों ले ली है। एजेंसी ने एफआईआर दर्ज करते हुए 6 सदस्यीय जाँच टीम का गठन किया है। यह टीम प्रयागराज पहुॅंच चुकी है।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, पुलिस द्वारा जुटा गए साक्ष्य, रिकॉर्ड किए गए बयान सहित अन्य दस्तावेज लेने के बाद एजेंसी अपनी जाँच आगे बढ़ाएगी। 22 सितंबर को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इस मामले की सीबीआई जाँच की सिफारिश की थी, जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया था।

कई संतों ने यह मानने से इनकार करते हुए कि महंत नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या की थी, इस घटना की सीबीआई जाँच की माँग की थी। अखाड़ा परिषद के महंत हरि गिरि ने कहा था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मामले से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं। उनके बयान के कुछ घंटों बाद ही यूपी सरकार ने सीबीआई जाँच की सिफारिश की थी। सीबीआई की टीम प्रयागराज में जब छानबीन शुरू करेगी तो उसके सामने सबसे बड़ा सवाल होगा कि नरेंद्र गिरि की मौत कैसे और किन परिस्थितियों में हुई। फिलहाल, पुलिस ने उस कमरे को सील कर दिया है जिसमें महंत नरेंद्र गिरि का शव मिला था। बताया जा रहा है कि इसी कक्ष से सीबीआई छानबीन शुरू करेगी।

बता दें कि 20 सितंबर को महंत नरेंद्र गिरी मृत पाए गए थे। मगर उन्होंने आत्महत्या की थी या फिर यह कोई साजिश थी, अब तक इससे पर्दा नहीं उठ पाया है। महंत नरेंद्र गिरि की कथित आत्महत्या मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। संदीप तिवारी को 22 सितंबर की शाम गिरफ्तार किया गया था। उससे पहले दो अन्य आरोपितों आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी को गिरफ्तार किया गया और बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने इन दोनों आरोपितों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। महंत नरेंद्र गिरि का शव मठ में पंखे से लटका मिला था। उनके पास से सुसाइड नोट भी मिला था जिसमें उन्होंने अपने शिष्य आनंद गिरि समेत तीन लोगों को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया था। हालाँकि सुसाइड नोट के असली होने पर सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि सुसाइड नोट में किया गया हस्ताक्षर नरेंद्र गिरि द्वारा उनके पिछले दस्तावेजों किए गए हस्ताक्षर से अलग थे।

इस गुत्थी को एक वीडियो ने और उलझा दिया है जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि यह पुलिस के मौके पर पहुँचने के ठीक बाद का है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार वीडियो 1.45 मिनट का है। जिस कमरे में नरेंद्र गिरि शव लटका मिला था, उस कमरे का पंखा तेजी से चल रहा था। ऐसे में पूछा जा रहा है कि चलते पंखे से कोई फंदा ​कैसे लगा सकता है? य​दि इसे किसी ने शव उतारने के बाद चलाया तो ऐसा क्यों किया? वीडियो में महंत का शव फर्श पर और पीले रंग की रस्सी पंखे से लटकी दिख रही है। वीडियो में पुलिस अधिकारी मठ में मौजूद शिष्यों से पूछताछ कर रहे हैं।

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