बस्तर| छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में बुधवार को 43 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें से एक माओवादी के ऊपर 1 लाख रुपए का इनाम भी घोषित है। बताया जा रहा है कि सभी माओवादी सुकमा पुलिस के ‘पूना नर्कोम’ यानी ‘नई सुबह का सूरज’अभियान से प्रभावित हुए और सरकार के समक्ष हथियार डाल दिए। सरेंडर करने के बाद सभी ने एक स्वर में कहा कि, हमें नक्सलवाद से मुक्ति चाहिए। साथ ही रोजगार की भी इन्होंने मांग की है। सरेंडर के बाद सुकमा के SP सुनील शर्मा व CRPF के अधिकारियों ने सभी के साथ बैठ कर लंच भी किया।

ये सभी माओवादी सुकमा जिले के 10 अलग-अलग गांवों के रहने वाले हैं। इनमें से 18 माओवादी कुकानार, 19 गादीरास, 4 तोंगपाल, 1 फुलबगड़ी व 1 चिंतागुफा थाना इलाके के हैं। फुलबगड़ी थाना क्षेत्र का रहने वाला पोड़ियामी लक्ष्मण संगठन में मिलिशिया कमांडर है। यह 1 लाख रुपए का इनामी भी है। साथ ही पिछले कई सालों से संगठन के साथ जुड़कर काम कर रहा था। हत्या, लूट आगजनी जैसी कई बड़ी वारदातों में भी शामिल रहा है। पुलिस के अनुसार फुलबगड़ी थाना इलाके में कई बड़े नक्सली लीडर भी हैं। वहीं लक्ष्मण के सरेंडर के बाद अब नक्सलियों के बारे में भी एक बड़ा खुलासा हो सकता है।

रोजगार की उठी मांग

सुकमा पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किए माओवादियों ने रोजगार की मांग की है। उन्होंने कहा कि, हमें आजीविका चलाने के लिए रोजगार चाहिए। साथ ही अंदरूनी गांव में सड़क व पुल का निर्माण करवाया जाए। बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए जिन-जिन इलाकों में नक्सलियों ने स्कूल आश्रम तोड़े हैं उसे भी जल्द से जल्द बनाया जाए। ताकि आने वाली पीढ़ी को किसी तरह की कोई परेशानियों का सामना न करना पड़े। सुकमा के एसपी सुनील शर्मा ने सभी को विश्वास दिलाया है कि सभी को छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति का लाभ जरूर मिलेगा।

अब तक 176 नक्सली डाल चुके हैं हथियार

9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर सुकमा के SP सुनील शर्मा ने इस ‘पूना नर्कोम’ अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान के शुरुआत करते ही अंदरूनी इलाके के ग्रामीणों का भी पुलिस को भरपूर सहयोग मिला। इस अभियान में पुलिस अपने हर कार्यक्रम में ग्रामीणों को साथ लेकर चल रही है। साथ ही ग्रामीणों का भरोसा जितने का काम भी किया जा रहा है। इस अभियान से प्रभावित होकर सुकमा पुलिस के सामने अब तक 176 नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। इन सरेंडर नक्सलियों में कई हार्डकोर इनामी भी हैं। जो मुख्यधारा में लौट कर विकास के सहयोगी बने हैं।

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