भारत में आज़ादी से पहले सूचनाओं के आदान-प्रदान करने के साथ साथ आजादी के लिए एक जुट होने का संदेश देना मुख्य सिद्धांत हुआ करता था| भारत को आज़ादी 1947 में मिलने के बाद समाचारों के सिद्धांत भी बदले, अब वह शिक्षित, सूचित करना और धीरे धीरे समय के साथ मनोरंजन भी एक हिस्सा बन चला| छत्तीसगढ़ में माना जा सकता है की समाचार पत्रों की शुरुआत 20 वीं सदी से शुरू हुई थी| साल 1900 में “छत्तीसगढ़ मित्र” नाम से पहली मासिक पत्रिका प्रकाशित हुई, इसे छत्तीसगढ़ के पहले पत्रकार कहे जाने वाले माधव राव सप्रे ने बिलासपुर के पेंड्रा रोड से प्रकाशित किया था| शुरूआती चरण में इस मासिक पत्रिका रायपुर के ही कय्यूमी प्रेस में हुआ करती थी, बाद में पत्रिका का प्रकाशन नागपुर से संचालित होने लगा| 3 साल के बाद यह छत्तीसगढ़ मित्र पत्रिका बंद हो गयी| लेकिन इसके बाद पत्रकारिता ने छत्तीसगढ़ में नया मोड़ लिया| छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता को भाषा और शैली के रूप मे एक आकार मिल गया। छत्तीसगढ़ मित्र के बाद 1935 में सुंदरलाल त्रिपाठी ने रायपुर से मासिक पत्रिका ‘उत्थान’ का प्रकाशन किया। जिसमें शिक्षा और साहित्य से संबंधित लेख दिए जाते थे। इसके बाद 1942 में रायपुर से मासिक ‘अग्रदूत’ का प्रकाशन किया गया, जिसे 1946 से साप्ताहिक पत्र के रूप में शुरू किया गया। वहीं 1951 में प्रतिदिन प्रकाशित होने वाला ‘महाकौशल’ नाम का पत्र प्रकाशित हुआ। जो की छत्तीसगढ़ का पहला दैनिक पत्र था। भले ही छत्तीसगढ़ में प्रथम प्रकाशन का श्रेय बिलासपुर के पेंड्रारोड को जाता है, लेकिन वहीं रायपुर को प्रथम दैनिक पत्रिका निकालने का श्रेय है। तो यहां से शुरू हुआ छत्तीसगढ़ में पत्र-पत्रिकाओं का दौर।

छत्तीसगढ़ की पहली पत्रिका “छत्तीसगढ़ मित्र” है, अंचल का यह पहला लोकप्रिय प्रकाशन जो था। वर्ष 1989 में राजनांदगांव में “प्रजाहितैषी” नाम की साप्ताहिक पत्रिका का पंजीयन पहले से हो चूका था। जिसे भगवानदीन सिरोकिया ने द्वारा कराया गया था। पर इस साप्ताहिक पत्रिका के प्रकाशन का ब्यौरा नहीं मिलने के कारण इसे पहली पत्रिका की ख्याति नहीं मिल पायी। वहीं “छत्तीसगढ़ मित्र” राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त करने वाली राज्य की पहली पत्रिका बनी। राजनादगांव में प्रथम हिंदी साप्ताहिक के नाम से ‘प्रजाहितैषी’ के पंजीयन के बाद से अब तक छत्तीसगढ़ में 500 से ज्यादा पत्र-पत्रिकाओं का पंजीयन हो चुका है।

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