प्रदेश में पहली बार पॉक्सो एक्ट में मौत की सुनाई गई सजा, साढ़े तीन साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद की थी हत्या

CHATTISGARH CRIME

राजनांदगाव| छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में साढ़े तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म कर हत्या मामलें में कोर्ट ने फैसला सुनाया जो पहले कभी नहीं हुआ| फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दोषी शेखर कोर्राम (24 वर्ष) को फांसी की सजा सुनाई है। जिले में संभवत: यह पहला मामला है, जब किसी को मौत की सजा सुनाई गई हो। वहीं, कोरबा में भी एक नाबालिग से दुष्कर्म मामले में कोर्ट ने दो दोषियों को 14 साल कैद की सजा सुनाई है।  

एक साल पुराना है मामला

दरअसल मामला राजनांदगांव के कोतवाली क्षेत्र में चिखली के एक गांव कांकेतरा का है। साल 2020 के 22 अगस्त को बच्ची लापता हो गई थी। तब परिवार वालों ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने जब छानबीन की, तो पता चला कि घर से करीब 100 मीटर दूर रहने वाले शेखर कोर्राम को उसके साथ देखा गया था। इसके बाद पुलिस ने शेखर को संदिग्ध मानकर उसके घर दबिश दी। तलाशी के दौरान वहां पलंग और दीवार के बीच बच्ची का शव बरामद हुआ। पूछताछ में शेखर ने बताया कि वह बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर साथ ले आया था। दुष्कर्म के बाद बच्ची ने शोर मचाया तो उसने तकिए के कवर से उसका मुंह दबाकर हत्या कर दी। शव को ठिकाने लगाता इससे पहले ही पुलिस ने शेखर को दबोच लिया। पुलिस ने तेजी से जांच पूरी की और DNA टेस्ट रिपोर्ट के साथ 19 सितंबर को चालान पेश किया। इस बीच बच्ची को इंसाफ दिलाने के लिए शहर भर में प्रदर्शन और रैलियां होती रहीं।

सुनवाई चली 1 साल तक
 
फास्ट ट्रैक एडीजे कोर्ट ने एक साल तक चली सुनवाई के बाद सोमवार को शेखर कोर्राम को मौत की सजा सुनाई। जस्टिस शैलेष शर्मा ने जजमेंट में लिखा कि यह समाज के लिए घृणित हरकत और कलंक है। फैसले से मौत के बाद ही सही, लेकिन बच्ची को न्याय मिलेगा। लोक अभियोजक परवेज अख्तर का दावा है कि पॉक्सो (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस) एक्ट में प्रदेश में पहली बार किसी को फांसी की सजा हुई है।

एक अन्य रेप केस में 2 लोगों को दी गई 14 साल की सज़ा

कोरबा में भी 2 साल पहले हुए रेप मामले में दो दोषियों को 14 साल की सजा सुनाई गई। बालको क्षेत्र में 26 जून 2019 को ग्राम सराईपाली के तिरथ धनवार और झिंथो सिंह गाड़ा ने एक नाबालिग को अगवा कर लिया था। इसके बाद जंगल में ले जाकर दुष्कर्म किया और नाबालिग को जंगल में ही छोड़ दिया। जब परिजन ढूंढने निकले तो पीड़िता का पता चला। कोर्ट ने दोनों को 14 साल की सजा और 2000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।

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