1992-बाबरी केस में कल्याण सिंह ने कारसेवकों कि कैसे की थी मदद

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भारत में 1992 में हुए बाबरी मस्जिद का ढांचा ध्वस्त करने में सबसे बड़े योगदान में यूपी के उप मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह का भी नाम शामिल है। वक़्त था जून 1991 एक तरफ जहां केंद्र में वीपी सिंह की सरकार जा चुकी थी उधर उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 425 में 221 सीटों पर जीतकर सरकार बनाई। अब राजनैतिक गलियारों में गूंज थी ” राम लला हम आएंगे मंदिर वहीँ बनाएंगे” और इन्ही नारो के साथ भाजपा के अटल विहारी वाजपाई, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी की तिकड़ी की गूँज चारों तरफ थी। इसी दौरान 24 जून 1991 में कल्याण सिंह ने सीएम पद की शपथ ली थी।

कैसे कल्याण सिंह ने की थी लाखों कारसेवकों की मदद ?

जब आयोध्या में कार सेवक जमा होने लगे थे तब उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस पर दबाव बनने लगा था। जिसके बाद तत्कालित सीएम कल्याण सिंह ने विधान-सभा में लिखित आश्वाशन दिया की सरकार विवादित ढाँचे को आंच नहीं आने देंगे। इतना ही नहीं कल्याण सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में 4 बिंदुओं का हलक नाम दाखिल किया जिसमें कहा गया की, मस्जिद की सुरक्षा सुनिचित की जाएगी। कार सेवा सिर्फ सांकेतिक होगी। इस तरह से तत्कालीन सीएम रहे कल्याण सिंह द्वारा कार सेवकों की यह पहली मदद थी। ताकि दबाव काम कार उद्देश्य को आगे बढ़ाया जाए।

साल 2009 में भी इसी प्रकार की बातें कही जो 2020 में को एक मिडिया चैनल से बात चित के दौरान, कल्याण सिंह ने बताया की ” 6 दिसंबर को जब माहौल बिगड़ने लगा तब मुझे आयोध्या के जिला अधिकारी का फ़ोन आया, उन्होंने बताया की 3.5 लाख के आसपास कारसेवक जमा हो चुकें हैं। केंद्रीय सुरक्षाबल मंदिर परिसर के तरफ बढ़ रहे हैं लेकिन साकेत कॉलेज के पास कारसेवकों ने उनका रास्ता रोक रखा हैं। मुझसे पूछा गया की क्या कारसेवकों पर फायरिंग करने का आदेश मिल सकता है। मेने ऐसा ना करने का आदेश लिखित में दिया, मेरा वह आदेश आज भी फाइलों में होगा। फायरिंग करने से हालत और बिगड़ सकते थे, कई लोगों की जान जा सकती थी। ना सिर्फ यहां बल्कि पुरे देश में कानून व्यवस्था की स्तिथि ख़राब हो सकती है। मुझे अपने पर आज भी इस फैसले पर गर्व है की मेरी सरकार चली गई लेकिन मैंने कारसेवकों की जान बचा ली, दूसरी तरफ में यह भी सोचता हूँ की शायद इस विध्वंश से ही मंदिर निर्माण का रास्ता खुला है। यह थी कारसेवकों की दूसरी मदद।

1992 बाबरी केस की जांच करने के लिए लिब्रहान आयोग ने 17 साल में रिपोर्ट तैयार की, जिसमें तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह के गोली ना चलने की बात भी कही गई। लखनऊ के स्पेशल सीबीआई अदालत के जज एस के यादव ने 30 सितंबर, 2020 को फैसला सुनाया था जिसमें कहा गया की घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, जो कुछ हुआ अचानक से हुआ था। जिसके बाद कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया साथ ही कहाँ अभियोजन पक्ष आरोपियों की संलिप्त को लेकर साक्ष पेश नहीं कार पाया। पूर्व सीएम रहे कल्याण सिंह का 21 अगस्त को निधन हो गया है, उनकी आयु 89 वर्ष थी।

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