जल्दबाजी में ही सही रविवार को 4 बज कर 35 मिनट 53 सेकंड पर कुम्हारी फ्लाईओवर को हल्के वाहनों के लिए खोल दिया गया। अनुज शुक्ला और बिरेंद्र कुमार साहू ने इस ब्रिज से अपनी बाइक को सबसे पहले निकाला। उनका कहना था कि भले ही ब्रिज का निर्माण अधूरा हो, लेकिन हल्के वाहनों को यहां जाने की जो छूट दी गई है वह काफी राहत वाली है। वहीं परमानंद साहू, अजय पाण्डेय, सुरेश बहादुर और लामलोचन जैसे बाइक सवारों का कहना था कि ब्रिज को खोलकर काफी अच्छा निर्णय लिया गया है, लेकिन सुरक्षा के मानकों से समझौता करना ठीक नहीं है।

फ्लाईओवर में इतनी बड़ी खामियां है कि जरा भी सावधानी हटी तो यह किसी बड़ी दुर्घटना को आमंत्रण दे सकता है। NHAI के अफसर बताते हैं कि कलेक्टर के निर्देश पर फ्लाईओवर की शुरुआत कर दी गई है। जो भी कमियां हैं, उसे भी तीन-चार दिन में सुधार लेंगे। इसे खोलने और बंद करने की जिम्मेदारी ट्रैफिक पुलिस की है। वह यह भी साफ करते हैं कि कोई अनहोनी होती है तो उनकी जिम्मेदारी कहीं से नहीं बनती है। फिलहाल इसके खुलने से चार व दो पहिया वाहन चालकों के चेहरे में काफी खुशी दिखी।

कलेक्टर दुर्ग डॉ. एसएन भूरे ने रविवार शाम से कुम्हारी ओवरब्रिज को हल्के वाहनों को खोलने के निर्देश दिए थे। इसे देखते हुए NHAI अधिकारियों ने रात भर ब्रिज के ऊपर डामर करके सड़क तैयार की। इसके बाद ब्रिज को जोड़ने वाली अप्रोच रोड का बेस वर्क कंप्लीट किया गया। इस कार्य को पूरा करने के लिए दूसरी साइट से पेवर और बेस करने की मशीनें मंगाई गई थीं। रात भर काम करने के बाद ब्रिज के एक साइड का पूरा काम नहीं हो सका। आखिर में अधिकारियों ने निर्देश के मुताबिक इसे आधी अधूरी तैयारी के साथ ही शुरू कर दिया है।

क्रैश बैरियर नहीं लगा पूरा

किसी ओवरब्रिज को शुरू करने से पहले ब्रिज के दोनों किनारों में क्रैश बैरियर लगाए जाते हैं। इससे यदि कोई वाहन अनियंत्रित होता है तो वह क्रैश बैरियर से टकराकर ब्रिज के ऊपर ही रह जाता है नीचे नहीं जाता। बिना क्रैश बैरियर के इस ब्रिज को शुरू करके बड़ी अनहोनी को आमंत्रण दिया गया है। हालांकि NHAI के अधिकारियों का कहना है कि दो तीन दिन में वह इसे बना देंगे, लेकिन शाम के समय जब तेज रफ्तार में सैकड़ों में की संख्या में वाहन निकलेंगे अनहोनी की आशंका काफी बढ़ जाएगी।

अप्रोच रोड का नहीं हुआ डामरीकरण


ओवरब्रिज को जोड़ने वाली दोनों तरफ की एप्रोच रोड में केवल बेस किया गया है। उसके ऊपर डामरीकरण नहीं किया गया है। इससे यहां से तेज रफ्तार गाड़ियां निकलने से गिट्टी उखड़ कर चटक रही हैं। साथ ही ब्रेक लगाने पर गाड़ी स्लिप करने का भी खतरा अधिक बढ़ गया है।
हैवी वाहनों के बीच से होकर ओवरब्रिज जा रहे छोटे वाहन

रायपुर से दुर्ग को जाने वाले सभी वाहन कुम्हारी तक एक ही सड़क से आते हैं। इसके बाद कुम्हारी ओवरब्रिज के पास से हैवी वाहन सर्विस रोड और हल्के वाहन ओवरब्रिज से होकर निकल रहे हैं। ऐसे में हल्के वाहनों को हैवी वाहनों के बीच से होकर ब्रिज चढ़ना पड़ रहा है। पहले दिन ही यदि ट्रैफिक पुलिस हैवी वाहनों को रोक-रोकर आगे नहीं बढ़ाती तो यहां दुर्घटना हो जाती है। इस बारे में एनएचएआई के इंजीनियर एसके झा का कहना है कि ट्रैफिक डीएसपी ने ओवरब्रिज आने से पहले ही हैवी और हल्के वाहनों अलग-अलग लेन में किया जाएगा।

ओवरब्रिज पार करने के बाद भी दुर्घटना का खतरा

जैसरे ही कुम्हारी ओवरब्रिज बार करके गाड़ियां एनएच में आएंगी तो वहां सर्विस रोड की हैवी गाड़ियां और ब्रिज की हल्की गाड़ियां एक साथ आगे बढ़ेंगी। ऐसे में वहां बड़ा दुर्घटना होने की आशंका है। इसलिए यहां भी रायपुर से दुर्ग जाने वाली लेन को दो भागों में डाइवर्ट करना होगा।

दुर्घटना की आशंका से पहले दिन ही घबराये अधिकारी

कुम्हारी ओवरब्रिज जब शुरू किया गया तो तो यहां एनएचएआई के ईई, एसडीओ, सब इंजीनियर और इंजीनियर सभी मौजूद थे। इस दौरान जिस तरह तेजी से कारें और बाइक ब्रिज में तेजी से चढ़े उसे देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। उनका कहना है कि अब वह इस ब्रिज को बंद कर देंगे। जब भी यहां जाम की स्थित निर्मित होगी तो इसे हल्के वाहनों के लिए खोला जाएगा। इससे जाम भी नहीं लगेगा और दुर्घटना की आशंका भी कम हो जाएगी।

By Desk

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