आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप में अब होगा डीआरएस, डकवर्थ लुइस सिस्टम में भी किए नियम तय

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नई दिल्ली| दुबई में शुरू होने जा रहे आईसीसी पुरुष टी-20 वर्ल्ड कप में पहली बार डीआरएस यानि डिसीजन रिव्यू सिस्टम का इस्तमाल किया जायेगा| आईसीसी ने इसे बारे में मंजूरी दे दी है| टी20 वर्ल्ड कप यूएई और ओमान में खेला जाना है और इसकी शुरुआत 17 अक्टूबर से होगी| टूर्नामेंट के लिए आईसीसी ने खेल से जुड़ी शर्तें बता दी हैं| इसके तहत पहली बार इस टूर्नामेंट में डीआरएस रहेगा| हर इनिंग्स के हिसाब से प्रत्येक टीम को दो-दो रिव्यू मिलेंगे| आईसीसी ने जून 2020 में इस बारे में कहा था कि टी20 वर्ल्ड कप के दौरान प्रत्येक पारी में हर टीम को एक अतिरिक्त रिव्यू मिलेगा| ऐसा कोरोना के चलते कम अनुभव वाले अंपायरों की मौजूदगी को देखते हुए किया गया था| इसके बाद टी20 और वनडे में एक पारी में हरेक टीम को दो और टेस्ट में तीन रिव्यू दिए जाते हैं|

आईसीसी ने इस बार बारिश के वजह से मैच में देरी होने या रद्द होने की समस्या को लेकर भी फैसले किए हैं| इसके तहत न्यूनतम ओवरों की संख्या को बढ़ा दिया गया है| टी20 वर्ल्ड कप में ग्रुप स्टेज में मैच का नतीजा निकालने के लिए हर एक टीम को कम से पांच ओवर बैटिंग करना जरूरी है| इसके बाद ही डकवर्थ लुइस सिस्टम से फैसला होगा| अभी टी20 क्रिकेट में यही फॉर्मूला चलता है| लेकिन वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल और फाइनल मैचों के लिए न्यूनतम ओवरों की संख्या को बढ़ा दिया गया है| इन मैचों में दोनों टीमों के कम से कम 10 ओवर खेल लेने के बाद ही मैच का नतीजा निकाला जाएगा| पिछले साल महिला टी20 वर्ल्ड कप के दौरान भी यही तरीका अपनाया गया था| तब भारत और इंग्लैंड के बीच सेमीफाइनल मैच में बारिश हुई थी|

5 वर्ष के बाद होने जा रहा है पुरुष टी20 वर्ल्ड कप

पुरुष टी20 वर्ल्ड कप करीब पांच साल बाद हो रहा है| इससे पहले 2016 में भारत में यह टूर्नामेंट खेला गया था| तब इंटरनेशनल टी20 क्रिकेट में डीआरएस इस्तेमाल नहीं होता था. इस वजह से टी20 वर्ल्ड कप में भी डीआरएस नहीं था| आईसीसी के पहले टी20 टूर्नामेंट में डीआरएस की शुरुआत 2018 से हुई थी| तब वेस्ट इंडीज में हुए महिला टी20 वर्ल्ड कप में हरेक पारी के हिसाब से एक-एक रिव्यू मिलता था| फिर 2020 के महिला वर्ल्ड कप में भी ऐसा ही हुआ था|

क्रिकेट में डीआरएस की शुरुआत अंपायरों के फैसलों में होने वाली खामियों में कमी लाने के लिए की गई थी| 2017 से इसका इस्तेमाल आईसीसी के सभी बड़े टूर्नामेंट में हो रहा है| इसके तहत अंपायर किसी फैसले को लेकर थर्ड अंपायर से मदद ले सकते हैं तो खिलाड़ी मैदानी अंपायर के किसी फैसले को चुनौती दे सकते हैं|

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