बांग्लादेश में टीपू सुल्तान रोड के मंदिर में मुस्लिमों ने पूजा करने से हिंदुओं को रोका, बदलनी पड़ी मूर्तियों की जगह, आक्रोश में हिंदू

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नई दिल्ली| बांग्लादेश की राजधानी ढाका के टीपू सुल्तान रोड स्थित दुर्गा मंदिर में हिन्दुओं को स्थानीय मुस्लिमों द्वारा नवरात्रि की पूजा करने से रोक दिया गया। ‘बांग्लादेश हिन्दू यूनिटी काउंसिल’ ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी दी है। बताया गया है कि स्थानीय इस्लामी कट्टरपंथियों ने नवरात्रि के दौरान शंखनिधि मंदिर में हिन्दुओं को माँ दुर्गा की पूजा नहीं करने दी। हालाँकि, वहाँ की सरकार ने दुर्गा पूजा के लिए हिन्दुओं को एक अस्थायी जगह दे दी है।

अब उक्त मंदिर से देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को भी उसी अस्थायी जगह पर स्थानांतरित किया जा रहा है, जहाँ अब पूजा होगी। ‘बांग्लादेश हिन्दू यूनिटी काउंसिल’ ने विश्वास जताया कि एक दिन हम अपने मंदिर को बचाने में कामयाब होंगे। साथ ही उसने उस जगह की भी तस्वीरें शेयर की, जहाँ अब दुर्गा पूजा किया जा रहा है। इस मंदिर का निर्माण कोलकाता के लालमोहन साहा ने सन् 1921 में करवाया था।

मंदिर के साथ-साथ उन्होंने एक ‘शंखनिधि हाउस’ भी बनवाया था। बांग्लादेश के 1971 में पाकिस्तान से आज़ाद होने के बाद कई हिन्दू वहाँ जाकर बस गए थे। लेकिन, वहाँ की सरकार ने उस इमारत को प्राइवेट हाथों में दे दिया। 1960 में ‘शंखनिधि हाउस’ को आर्कियोलॉजी विभाग की सूची में डाला गया। इसके बाद उत्तरी दिशा में स्थित मंदिर को तोड़ दिया गया और इस इमारत की छतें भी तोड़ डाली गईं।

हाल ही में नवरात्रि के दौरान इस मंदिर पर हमला किया गया, जिसके बाद प्रतिमाओं को सड़क पर निकाल कर पूजा करना पड़ा। हिन्दुओं ने स्थानीय मुस्लिमों के इस हमले के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन भी किया। उन्होंने अपने हाथों में बोर्ड्स ले रखे थे। BHUC ने एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें हिन्दू मजबूरी में सड़क पर ही पूजा करते दिख रहे हैं। अब मंदिर पर हमले के कारण अस्थायी सरकारी जगह पर पूजा हो रही है।

अभी इसी सप्ताह बांग्लादेश के चटगाँव के फिरंगी बाजार इलाके में रविवार (अक्टूबर 10, 2021) को इस्लामी चरमपंथियों ने श्री शमशानेश्वर शिव विग्रह मंदिर की दुर्गा प्रतिमा को तोड़ दिया था। हमला सड़क पर उस समय हुआ जब चटगाँव के कोतवाली में पूजा मंडप में माँ दुर्गा की मूर्ति को प्रवेश कराया जा रहा था। पुलिस ने एक को गिरफ्तार किया है। चटगाँव में कोतवाली की सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन भी हुए थे।

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