डॉ. वर्गीज कुरियन के जन्मदिन पर प्रत्येक साल 26 नवंबर को देश भर में राष्ट्रीय दुग्ध दिवस मनाया जाता है| वे भारत में श्वेत क्रांति के जनक थे| राष्ट्रीय दुग्ध दिवस दूध और दूध उद्योग से संबंधित गतिविधियों के प्रचार एवं लोगों में आजीवन दूध एवं दूध उत्पादों के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करने हेतु मनाया जाता है|

भारत इस वर्ष डॉ. वर्गीज कुरियन की 98 वीं जयंती मना रहा है| कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने घोषणा की कि साल 2014 और साल 2016 के दौरान भारतीय दूध उत्पादन में 6.28 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है| साथ ही, प्रति व्यक्ति दूध की खपत क्षमता 307 ग्राम प्रति दिन (2013-14) से बढ़कर 340 ग्राम प्रति दिन (2015-16) हो गई|

राष्ट्रीय दुग्ध दिवस का इतिहास

यह दिवस भारतीय डेयरी एसोसिएशन (आईडीए) ने साल 2014 में पहली बार मनाने की पहल की थी. विश्व दुग्ध दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा हर साल 01 जून को मनाया जाता है. पहला राष्ट्रीय दुग्ध दिवस 26 नवम्बर 2014 को मनाया गया था. इस दिवस में 22 राज्यों के विभिन्न दुग्ध उत्पादकों ने भाग लिया था.

डॉ. वर्गीज कुरियन के बारे में

• वर्गीज कुरियन का जन्म 26 नवंबर 1921 को कोझिकोड, केरल में हुआ था.

• वे एक प्रसिद्ध भारतीय सामाजिक उद्यमी थे और आज भी दुनिया के सबसे बड़े कृषि विकास कार्यक्रम ‘ऑपरेशन फ्लड’ के लिए प्रसिद्ध हैं.

उन्हें भारत में ‘श्वेत क्रांति के जनक’ के रूप में भी जाना जाता है.

• उन्होंने करीब 30 संस्थानों की स्थापना की जो विभिन्न किसानों और श्रमिकों द्वारा चलाए जाते हैं. कुरियन ने अमूल ब्रांड की स्थापना एवं सफलता में अहम भूमिका निभाई.

• उन्हें साल 1963 में ‘रेमन मैग्सेसे’ पुरस्कार और साल 1989 में ‘विश्व खाद्य’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

• उन्हें भारत सरकार द्वारा साल 1965 में पद्म श्री, साल 1966 में पद्म भूषण और साल 1999 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था.

• उन्होंने देश को दूध की कमी से निकालकर विश्व का सबसे अधिक दुग्ध उत्पादक बनाया.

• उनका 90 वर्ष की आयु में 09 सितंबर 2012 को निधन हो गया.

व्हाइट रेवल्यूशन या दुग्ध क्रांति

दुग्ध क्रान्ति या ऑपरेशन फ्लड भारत की योजना है जिससे कि भारत में दूध की कमी को दूर किया जा सके। इसे ‘श्वेत क्रांति’ भी कहते हैं। 13 जनवरी 1970 को इसकी शुुुरुवात हुई ।

दुग्ध कृषि ,या ‘डेरी उद्योग’ या ‘दुग्ध उद्योग’, कृषि की एक श्रेणी है। यह पशुपालन से जुड़ा एक बहुत लोकप्रिय उद्यम है जिसके अन्तर्गत दुग्ध उत्पादन, उसकी प्रसंस्करण और खुदरा बिक्री के लिए किए जाने वाले कार्य आते हैं। इसके वास्ते गाय-भैंसों, बकरियों या कुछेक अन्य प्रकार के पशुधन के विकास का भी काम किया जाता है। अधिकतर डेरी-फार्म अपनी गायों के बछड़ों का, गैर-दुग्ध उत्पादक पशुधन का पालन पोषण करने की बजाए सामान्यतः उन्हें मांस के उत्पादन हेतु विक्रय कर देते हैं। डेरी फार्मिंग के अंतर्गत दूध देने वाले मवेशियों का प्रजनन तथा देखभाल, दूध की खरीद और इसकी विभिन्न डेरी उत्पादों के रूप में प्रोसेसिंग आदि कार्य सम्मिलित हैं।

By Desk

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