लखनऊ| उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव से दिल्ली दंगे के आरोपित उमर खालिद के पिता डॉ सैयद कासिम रसूल इलियास ने मुलाकात की। इसके बाद से प्रदेश की सियासत गरमा गई है। दोनों की इस मुलाकात पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दल राजनीति के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। अब इनसे भारत तेरे टुकड़े होने का नारा लगाने वाले के अब्बू मिले हैं।

देश विरोधी नारे लगाने और दिल्ली दंगों के आरोपित उमर खालिद के अब्बा इलियास भी कुछ कम नहीं हैं। वो भी इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया के सदस्य थे। इस प्रतिबंधित संगठन को भारत सरकार ने 2001 में आतंकी संगठन घोषित किया था। उमर खालिद के पिता की पार्टी, वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया ने प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों में सपा का समर्थन करने का ऐलान किया था। बता दें कि बीते 2 अक्टूबर को इलियास ने अखिलेश यादव से मुलाकात की थी।

मुख्यमंत्री ने बीजेपी की प्रतिनिधि सभा को संबोधित करते हुए कहा, “विपक्षी दल किसी भी हद तक जा सकते हैं। आपने देखा होगा कि हाल ही में एक पार्टी से मिलने के लिए कौन आया था उमर खालिद के पिता, जो भारत तेरे टुकड़े होंगे कहते हैं।”

सीएम ने आगे कहा, “वह व्यक्ति (उमर खालिद के अब्बा) समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष से मिलने के लिए आता है और उन्हें आश्वस्त करता है कि चिंता मत करो। हम कुछ साजिश रच रहे हैं।” अगर ऐसे लोग सत्ता में आते हैं तो उनसे क्या उम्मीद करते हैं। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पिछली कॉन्ग्रेस, एसपी या बीएसपी सरकारों ने जातिवाद के नाम पर सामाजिक ताने-बाने को नष्ट कर राज्य को दंगों की आग में झोंक दिया। इन सभी पार्टियों का खुद का हित इसी में है।

योगी आदित्यनाथ ने कोरोना का प्रभावी प्रबंधन करने और टीकाकरण अभियान के लिए प्रशंसा की है। सीएम ने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस, सपा और बहुजन समाज पार्टी की सरकार में महामारी आई होती तो स्थिति अलग हो सकती थी।

सीएम योगी ने राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी पर तंज कसते हुए कहा, “ज़रा सोचिए कि क्या होता अगर यह महामारी कॉन्ग्रेस की सरकार के दौरान आती। भाई और बहन इटली भाग गए होते।”

उन्होंने ये भी कहा, “सपा के शासन में महामारी होती तो गरीबों की परवाह किए बिना चाचा (शिवपाल सिंह यादव) और भतीजे (अखिलेश यादव) के बीच इस बात की रेस होती कि माफिया को कौन और कितना ठेका देता है।” उन्होंने आगे कहा, “अगर यह बहनजी मायावती के शासनकाल में होता तो भगवान ही मलिक होता।”

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोगों को अपनी जाति पर गर्व महसूस करने का अधिकार है लेकिन उन्हें राष्ट्रवाद को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने उन अत्याचारों को याद किया जो मुलायम सिंह यादव ने राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान हिंदुओं पर किए थे, जहाँ 2 नवंबर, 1990 को अयोध्या में पुलिस द्वारा सैकड़ों राम भक्त की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

सीएम के मुताबिक, वे रामद्रोही थे, जिन्होंने वोट बैंक के लिए उन पर गोली चलाने का आदेश दिया था। अगर उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार होती तो उन पर गोली चलाने की किसी की हिम्मत नहीं होती।

हालाँकि, इस पर सपा के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा, “वह (सीएम) साम्प्रदायिक लाइन के सहारे आने वाले चुनावों का ध्रुवीकरण करने के लिए ऐसे मुद्दों को उठा रहे हैं। हर कोई जानता है कि चुनाव में बीजेपी समाज का ध्रुवीकरण करने की कोशिश करती है।”

गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में गिरफ्तार उमर खालिद को पिछले साल पूर्वोत्तर दिल्ली में दंगों की साजिश के तहत यूएपीए एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था।

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