छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में एक बार फिर ग्रामीणों का आंदोलन शुरू हो गया है। गुरुवार को जिले के नक्सल प्रभावित गंगालूर के बुर्जी में दर्जनों गांव के सैकड़ों ग्रामीण इकठ्ठा हुए। ग्रामीणों ने एडसमेटा गोली कांड के मृतकों के परिजनों को 1-1 करोड़ व घायलों को 50-50 लाख रुपए का मुआवजा देने की सरकार से मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि, यदि उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो वे बीजापुर जिले से राजधानी रायपुर तक पदयात्रा करेंगे। ग्रामीणों ने राज्यपाल के नाम बीजापुर तहसीलदार अमित योगी को ज्ञापन भी सौंपा है।

इधर ग्रामीणों ने बीजापुर जिले के पुसनार में प्रस्तावित सुरक्षाबलों के नवीन कैंप का भी विरोध किया है। ग्रामीणों ने कहा- हमें पुसनार में पुलिस कैंप नहीं चाहिए। यदि गांव में पुलिस कैंप खुलता है तो जवान गांव में घुसेंगे। बेकसूर ग्रामीणों को नक्सली बताकर गिरफ्तार किया जाएगा। या फिर एनकाउंटर में उनकी हत्या कर देंगे। ग्रामीणों ने कहा है कि, हमें गांव में न तो कैंप चाहिए और ना ही सड़कें। लगभग 1 महीने पहले ही ग्रामीणों ने इलाके में निर्माणाधीन सड़क को भी कई जगह से काट दिया था। बुर्जी में आंदोलन में जुटे ग्रामीणों ने पहली बार इंकलाब जिंदाबाद के नारे भी लगाए।

पुलिस अधिकारियों को सजा देने की मांग
बीजापुर- सुकमा जिले के सरहदी इलाके सिलगेर में पुलिस की गोलियों से मारे गए ग्रामीणों के परिजनों को भी मुआवजा देने की मांग आंदोलनरत ग्रामीणों ने की है। उन्होंने कहा कि, सिलगेर में पुलिस कैंप के खिलाफ ग्रामीण शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस जवानों ने उन पर फायर खोल दिया था। पुलिस की गोली से 3 ग्रामीणों की मौत हुई ,जबकि भगदड़ में एक गर्भवती महिला ने भी दम तोड़ा था। ग्रामीणों ने पुलिस अधिकारियों को सजा देने की भी मांग की है।

क्या है एडसमेटा कांड?
17-18 मई 2013 की रात में बीजापुर जिले के एडसमेटा गांव में ग्रामीण बीज पंडुम मनाने इकठ्ठा हुए थे। नक्सल ऑपरेशन में निकले जवानों ने ग्रामीणों को नक्सली समझ कर गोलीबारी की थी। जवानों की गोली लगने से इस घटना में 4 नाबालिग समेत कुल 8 लोग मारे गए थे। इस घटना पर जस्टिस वी के अग्रवाल की कमेटी ने जांच रिपोर्ट के फैसले के आधार पर कहा था कि, मारे गए सभी लोग ग्रामीण थे। उनका माओवादियों से कोई संबंध नहीं था।

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