पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मंगलवार (2 नवंबर 2021) को सोनिया गाँधी को पत्र लिखकर कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे दिया। इसी के साथ उन्होंने अपनी नई पार्टी का भी ऐलान कर दिया है। कैप्टन अमरिंदर ने ‘पंजाब लोक कॉन्ग्रेस’ के नाम से अपनी नई पार्टी बनाई है। हालाँकि अभी रजिस्ट्रेशन बाकी है। चुनाव आयोग से अनुमोदन मिलने के बाद ही रजिस्ट्रेशन हो पाएगा और फिर इसके बाद पार्टी के चिन्ह को मंजूरी दी जाएगी।

पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को 7 पेज का इस्तीफा भेजा है। कैप्टन अमरिंदर ने अपने इस्तीफे में कॉन्ग्रेस आलाकमान की ओर से नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले पर चिंता व्यक्त की है और सोनिया गाँधी को लिखा है कि एक दिन कॉन्ग्रेस आलाकमान को अपने इस फैसले पर पछताना पड़ेगा। साथ ही 7 पन्नों की अपनी चिट्ठी में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कॉन्ग्रेस के साथ अपने कई सालों के जुड़ाव और मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए पंजाब के हित में किए गए कामों का लेखा-जोखा भी पेश किया है।

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इस्‍तीफे में कैप्‍टन ने सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा समेत पार्टी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा पर नवजोत सिद्धू, जो ‘एक अस्थिर व्यक्ति’ हैं और ‘पाकिस्‍तान के प्रति साफ्ट कॉर्नर रखने वाले’ हैं, को संरक्षण देने का आरोप लगाया और कहा कि सोनिया गाँधी ने ‘इस सब से आँखें मूँद लीं’।

बता दें कि पंजाब कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू से खींचतान के बीच 18 सितंबर को कैप्टन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस ने अपमान किया है। जल्दी ही पार्टी छोड़ दूँगा। उन्होंने आगे की रणनीति को लेकर पूछे गए सवालों पर कहा था कि वो दोस्तों और करीबियों से चर्चा के बाद फैसला लेंगे। इसके बाद उन्होंने नई पार्टी बनाने की घोषणा की थी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने 30 अक्टूबर को कहा था, ‘‘मैं जल्द ही अपनी पार्टी गठित करूँगा और किसानों के मुद्दे सुलझने के बाद पंजाब में विधानसभा चुनाव, 2022 के लिए बीजेपी, शिरोमणि अकाली दल से अलग हो चुके धड़ों और अन्य के साथ सीटों के बँटवारे के लिए बातचीत करूँगा। पंजाब और राज्य के किसानों के हित में मैं एक मजबूत सामूहिक ताकत चाहता हूँ।’’

बता दें कि मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान, तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ये कानून पिछले साल सितंबर में बनाए गए थे और प्रदर्शनकारी किसान इन्हें निरस्त करने की माँग कर रहे हैं।

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