बरमकेला :- विकासखण्ड बरमकेला में काफी लंबे अरसे से सोसायटी संचालकों (पीडीएस)के द्वारा मनमानी ढंग से बेखौफ होकर धड़ल्ले से सरकारी दर से भी अधिक कीमतों में खाद्यान्न सामग्रीयों को बेचा जा रहा है| मामला बरमकेला विकासखंड के सुदूर अंचलों में शुमार ग्रामपंचायत धौंरादरहा का जहां पर पीडीएस दूकान संचालित कर रहे घटेश्वरी स्व सहायता समूह की जिनके द्वारा उक्त ग्राम पंचायत के गरीबों से राशन सामग्रियों को शासकीय दर से अधिक दाम पर बेची जा रही है और राशनकार्डधारी लोगों से अवैध रूप से पैसा उगाही की जा रही है। यहां पर मुर्दे भी पीडीएस दूकान से राशन प्राप्त कर रहें है| दुकानदार द्वारा टेबलेट के जरिये मृत राशन कार्डधारकों की फोटो खींचकर उनके नाम से हर महीने खाद्यान्न् की आपूर्ति करना बता रहे हैं। पासपोर्ट साइज की फोटो या फिर पुराने राशन कार्ड में लगे मुखिया की फोटो को खींच लिया जाता है। इसके जरिए आसानी के साथ फर्जीवाड़ा को अंजाम दे रहे हैं। बायोमेट्रिक प्रणाली से खाद्यान्न् का वितरण किया जाना है। ऐसा नहीं हो रहा है। राशन दुकानदार बायोमीट्रिक प्रणाली के बजाय आनलाइन फोटो पद्वति का उपयोग कर गड़बड़ी को अंजाम दे रहे हैं।

बीओ – आपको बतादें कि बरमकेला के घण्टेश्वरी महिला स्व सहायता समूह ग्राम पंचायत धौरादरहा का ताजा मामला प्रकाश में आया है । राशन कार्ड क्रमांक 223862305966 बेलमती पति चैतन्य अंत्योदय कार्ड जो कि मृत हो चुकी है उक्त मृत का राशन को भी वितरण दिखाकर गबन किया जा रहा है । ऐसे दो तीन और नाम है, पर फूड इंस्पेक्टर की सुस्त रवैया से ना तो कोई सोसाइटी में उचित कार्रवाई की गई है और ना ही बढ़ती कीमतों में बेच रहे सोसायटी संचालकों पर रोक लगा पा रहे हैं। लिहाजा भुगतना गरीब परिवारों को पड़ रहा है।

क्षेत्र की 75 प्रतिशत से अधिक सोसायटियों में शक्कर 20 किलो और मिट्टी तेल 50 रुपए लीटर संचालकों के द्वारा बेचा जा रहा है। जबकि 47 रुपये मिट्टी तेल एवं शक्कर 17 रुपये की दर से देना है,खुलेआम गरीबों के पेट मे डाका डाला जा रहा है । फूड इंस्पेक्टर तरुण नायक को कई ग्राम पंचायतों से उचित मूल्य की दुकानों में सरकारी रेट से अधिक रेट बेचे जाने की शिकायत मिलती रहती है, पर फूड इंस्पेक्टर के सुस्त रवैए से कहीं भी सोसायटियों में शिकायत होने के बाद भी कोई प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाती। जिससे कि ग्रामीणों में भारी रोष है।


यह कहना लाजमी होगा कि कार्यवाही करने के बजाय प्रति राशन दुकान से प्रतिमाह 500 रुपये कि कमीशनखोरी की जाती है, इस मामले में विभागीय उच्च अधिकारी के द्वारा प्रमुखता से जांच की जाएगी तो और बड़ी भ्रस्टाचार उजागर हो सकती है । बेखौप होकर इतनी बड़ी भ्रष्टाचार को अंजाम देना किसी संबंधित स्थानीय अधिकारी के संरक्षण मिलना देखी जा रही है । क्या मुर्दे के नाम से राशन गबन करने वाले डीलर पर एफआईआर की कार्यवाही की जाती है या सिर्फ वसूली कर खानापूर्ति की जाती है । इस तरह के भ्रष्टाचार पर बरमकेला के सभी राशन दुकानों की जांच की मांग उच्चाधिकारियों से की जावेगी ।

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