अक्सर अपने तीखे बयानों के लिए सुर्खियों में रहने वाले मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक इस बार बैकफुट पर हैं। दैनिक भास्कर को दिए एक एक्सक्लूसिव टेलिफोनिक इंटरव्यू में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं संघ (RSS) से माफी मांग ली है। मलिक का कहना है कि जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल रहने के दौरान 300 करोड़ रुपए की रिश्वत ऑफर किए जाने के मामले का RSS से कोई मतलब नहीं। उनसे गलती हो गई और वे माफी चाहते हैं।

दूसरी तरफ किसानों को MSP की गारंटी देने की पैरवी करने वाले मलिक ने दावा किया कि किसान आंदोलन का उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव पर मामूली असर पड़ेगा, लेकिन लोकसभा चुनाव में इसका बहुत गहरा असर होगा।

मलिक से भास्कर ने जम्मू-कश्मीर से 370 हटाने, किसान आंदोलन की मध्यस्थता, जाटों के नेता बनने की कोशिशों, उनके बार-बार तबादलों, लखीमपुर कांड समेत तमाम मुद्दों पर कड़े सवाल किए।

सवाल: आपका दावा है कि बतौर जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल आपको अंबानी और RSS से जुड़े एक शख्स की फाइल पास करने के लिए 300 करोड़ की रिश्वत का ऑफर की गई। क्या यह कोई बिजनेस डील थी?

जवाब: ये सारी गलत रिपोर्टिंग है। दरअसल, दो फाइलें थीं। यह बात सही है कि मुझे बताया गया था एक मामला अंबानी की कंपनी का है। यह छोटे अंबानी से जुड़ी फाइल थी। वहीं, दूसरी फाइल में किसी ने RSS को शामिल किया था। उसने यह कहा था कि मैं RSS से संबंधित हूं, लेकिन मामले में RSS का कोई लेना देना नहीं है। मुझे RSS का नाम भी नहीं लेना चाहिए था।

ऐसे तो व्यक्तिगत तौर पर लोग व्यापार कर ही रहे हैं। उसमें RSS कहीं नहीं हैं। अगर वो आदमी RSS से जुड़ा हुआ भी था तो उसमें RSS की कोई गलती नहीं है।

मुझे RSS की तरफ से कोई धमकी नहीं दी गई थी। पहले मामले में भी अंबानी खुद नहीं था। उनकी तरफ से काम करने वाली एक कंपनी थी।

अब पूरा मामला खत्म हो गया है। वो फाइल मैंने रोक दी थी। यह बिजनेस डील थी। एक फाइल इंश्योरेंस कंपनी की थी, जिसमें सरकारी कर्मचारियों के इंश्योरेंस का मामला था और दूसरी फाइल पावर सेक्टर की थी।

सवाल: आपने इस बात का खुलासा तुरंत क्यों नहीं किया? इस वक्त बोलने की क्या वजह है?

जवाब : ऐसी कोई बात नहीं है। ये तो वैसे ही उदाहरण के तौर पर मुझे याद आ गया तो मैंने बोल दिया। अब ये मामला खत्म हो गया है।

मैंने प्रधानमंत्री को पूरी बात बता दी थी। उन्होंने भी मुझे सपोर्ट किया और कहा कि आपने ठीक किया। भ्रष्टाचार से कोई समझौता नहीं करना है।

सवाल: आपने रिश्वत की पेशकश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की?

जवाब : यह रिश्वत की पेशकश नहीं थी। मुझे बताया गया था कि इसमें इतना पैसा शामिल है, जो बीच के लोग हैं उनको मिल जाएगा। अगर आप लेंगे तो आपको भी मिल जाएगा, लेकिन मैंने मना कर दिया था।

सवाल: आपने महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला पर रोशनी एक्ट के तहत सरकारी जमीन हासिल करने आरोप लगाया है। PDP ने अवमानना का लीगल नोटिस भेजा है इस पर आप क्या करेंगे?

जवाब: यह सच है। मैं आज भी इस पर कायम हूं कि इनके लोगों ने बहुत फायदा उठाया। बहुत से प्लॉट हासिल किए।

मुझे आज तक कोई नोटिस नहीं मिला है। नियम के मुताबिक मौजूदा राज्यपाल को किसी कानूनी प्रक्रिया में नहीं घसीटा जा सकता है। महबूबा को मुझे नोटिस देने की जरूरत नहीं है। वो तो मेरे दोस्त की बेटी हैं। मुझे फोन कर सकती हैं।

सवाल: आपने पिछले दिनों कहा कि MSP की लिखित गारंटी मिले तो किसान मान जाएंगे। क्या केंद्र सरकार यह बात मान लेगी?

जवाब : केंद्र सरकार अभी MSP को कानूनी मान्यता देने को राजी नहीं है। जहां तक तीनों कानून वापस लेने की बात है, तो उन कानूनों को तो कोर्ट ने पहले ही दो साल के लिए इन पर रोक लगा दी है।

यह मामला सरकार और किसानों के लिए बहुत करीब और बहुत दूर, दोनों है। सरकार को तो बस MSP को कानूनी मान्यता देनी है। मामला हल हो जाएगा। किसान भी अब थक चुके हैं और सरकार का नुकसान हो रहा है। ऐसे में इसे खत्म कर लेना चाहिए।

सवाल : आपने कहा कि जिस देश में किसान-जवान जस्टिफाईड नहीं होगा उसे कोई नहीं बचा सकता। क्या भारत में किसानों से अन्याय हो रहा है?

जवाब: किसानों के साथ तो पिछले 70 सालों से अन्याय ही हो रहा है। उनको आज तक फसलों का सही दाम नहीं मिला है। और भी बहुत तरह का अन्याय है। किसानों के साथ लगातार अन्याय जारी है।

सवाल : आपका दावा है कि आपने राकेश टिकैत की गिरफ्तारी रुकवाई थी। आपने किससे कहकर गिरफ्तारी रुकवाई थी?

जवाब : उस बात की ज्यादा गहराई में नहीं जाया जाता, लेकिन उसकी गिरफ्तार से सरकार को नुकसान होता। राकेश टिकैत के गांव में बहुत बड़े पैमाने पर भीड़ पहुंच चुकी थी और उस दिन महापंचायत होनी थी। दंगा भड़क सकता था। मैंने किसी को सुझाव दिया कि टिकैत को आज गिरफ्तार मत करो।

सवाल: आपने किसानों और केंद्र सरकार के बीच मध्यस्थता का ऑफर दिया है। आपको क्यों लगता है कि किसान आपकी बात मान लेंगे।

जवाब: मैंने मध्यस्थता का कोई ऑफर नहीं दिया। मैं तो जो दाएं-बाएं से दोनों पक्षों की मदद कर सकता हूं, उसके लिए हमेशा तैयार हूं। किसी तरह इस मामले का हल निकलना चाहिए।

सवाल: कहा जा रहा है कि आप जाट हैं इसलिए आप किसान आंदोलन को समर्थन कर रहे हैं। आंदोलन में जाट और जाट सिख अधिक हैं और आप उसे भुना रहे हैं?

जवाब : यह बिलकुल गलत है। मैं तो यह सब इसलिए कर रहा हूं क्योंकि मैं चौधरी चरण सिंह का शिष्य रहा हूं। उनके चरणों में बैठकर मैंने राजनीति को समझा हूं। मैं किसानों की समस्याओं को जानता हूं। जब मैं बच्चा था तो मेरे पिताजी का देहांत हो गया था। मैंने खुद खेती की थी इसलिए वो मेरे लिए क्लास इंटरेस्ट की बात है। कास्ट इसमें कहीं नहीं है।

सवाल: आपने पहले कहा था कि 14 मंजिल मकानों में रहने वाले शिक्षा और जवानों के लिए कुछ नहीं करते। हमारे देश में अमीरी सड़े हुए आलू की बोरी हैं। ये कौन लोग हैं?

जवाब: अब इस बात की चर्चा क्यों करते हो। यह सब आप भी जानते हो मैं भी जानता हूं। इस बात को अब यहीं छोड़ दो। इस बात को तो देश की जनता भी जानती है। (कुछ पल रुक कर)

मेरे कहने से आप एक बात जरूर लिखना कि मुझ से उस दिन गलती हुई थी। मैंने किसी व्यक्ति के संबंध में RSS का नाम लिया। इसमें RSS कहीं नहीं आती। हर आदमी व्यक्तिगत रूप से व्यापार करता है। मुझे RSS का नाम नहीं लेना चाहिए था। मैं इसके लिए माफी चाहता हूं।

सवाल: अब आप बात से पलट रहे हैं। ऐसा तो नहीं की आप पर कोई दबाव आ गया है?

जवाब : ऐसी बात नहीं हैं, लेकिन लोगों का रिएक्शन तो आता ही है कि RSS के बारे में ऐसा वैसा नहीं कहना चाहिए था। मुझे खुद भी एहसास हुआ कि मुझसे गलती हो गई है।

सवाल: आपके राज्यपाल रहते जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाई गई। कश्मीर में आज फिर आतंक जोर पकड़ रहा है। बाहरी लोगों की हत्या हो रही हैं। आपको क्या लगता है कि 370 हटाने का फैसला ठीक नहीं था या वो समय सही नहीं था?

जवाब : समय तो बिलकुल सही था। मैं उसके बाद वहां एक साल तक राज्यपाल रहा। एक गोली भी नहीं चलानी पड़ी थी। कहीं कोई दंगा नहीं हुआ था। तीन-तीन पूर्व मुख्यमंत्री गिरफ्तार हुए, लेकिन किसी ने कोई विरोध नहीं किया था।

सवाल : आप जम्मू कश्मीर से गोवा और उसके बाद मेघालय के राज्यपाल हैं। आपको नहीं लगता कि आपकी साफगोई का आपके तबादले में रोल है?

जवाब : मुझे इस बात का तो नहीं पता। हां, मेरे तबादले बहुत हुए हैं। जैसे किसी सरकारी अफसर के होते हैं। मुझे जहां भी भेजेंगे मैं वहां काम ही करुंगा। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। यह केंद्र सरकार का अधिकार है।

सवाल : चर्चा है कि आप सक्रिय राजनीति में आना चाहते हैं, इसलिए आए दिन बयान दे रहे हैं?

जवाब : मैं यह बात साफ कर दूं कि मैं राजनीति में बिलकुल भी नहीं आऊंगा। रिटायरमेंट के बाद एक या दो किताब लिखूंगा। इसके अलावा मेरा कोई प्लान नहीं है।

सवाल : आपने जाट सम्मेलन में कहा था कि आप सभी गोवा आओ, मैं आपको उन कमरों में ठहराऊंगा, जहां राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री रहते हैं। आप राज्यपाल हैं या जाट नेता?

जवाब : मैंने ये बात जाटों को नहीं कही थी। यह बात वहां बैठे सभी श्रोताओं से कही थीं। मैं आपको भी कह रहा हूं कि आप भी आएं राष्ट्रपति जी के लिए एक कमरा रखना होता है। उसको छोड़कर दूसरा कमरा दे सकते हैं।

सवाल: पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। क्या उन पर किसान आंदोलन का असर पड़ेगा?

जवाब : किसान आंदोलन का असर उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में थोड़ा बहुत पड़ेगा, लेकिन इसका अगले लोकसभा चुनाव में बहुत ज्यादा असर पड़ेगा। मैंने ये सब बातें प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान बता दी है।

सवाल : कुछ दिन पहले आप प्रधानमंत्री से मिले थे। आप तलब किए गए थे या खुद मिलने पहुंचे थे?

जवाब : नहीं, मुझे किसी ने तलब नहीं किया गया था। मैं तो अपनी इच्छा से प्रधानमंत्री से मिलने गया था।

सवाल : भाजपा ने कर्नाटक और गुजरात के मुख्यमंत्री बदल दिए। अब हरियाणा में बदलाव की चर्चा है। क्या चेहरे बदलने से भाजपा राज्य में बनी रहेगी?

जवाब : मैं इस बात में कुछ नहीं कहना चाहता हूं। वे जो ठीक समझ रहे हैं वो कर रहे हैं। मेरी कोई राय नहीं है। इसमें तो जनता की राय जरूरी है कि वो इसमें क्या सोच रही है।

सवाल: लखीमपुर खीरी में जो घटना हुई क्या उस मामले में देश के गृह राज्य मंत्री का त्यागपत्र देना चाहिए?

जवाब : इस पर भी मेरा बोलना ठीक नहीं है। लोग तो कह ही रहे हैं कि मंत्री जी को अपने पद से त्यागपत्र देना चाहिए।

सवाल : रिटायरमेंट के बाद का क्या करने का प्लान है?

जवाब : मैं रिटायर होने के बाद यदि स्वस्थ रहा तो किसानों के बीच जाऊंगा। अपनी किताब लिखूंगा इसके अलावा मेरा राजनीति में जाने का को

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