भगवान गणेश को आज किया जाएगा विदा, शहर के तालाबों के नज़दीक निगम ने बनाए विसर्जन कुंड

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रायपुर| छत्तीसगढ़ की राजधानी में 19 सितंबर से लेकर 22 सितंबर तक बड़ी धूम धाम से बाप्पा को विदा किया जायेगा| 19 सितंबर को अनंत चतुर्दशी है आज के दिन हिंदू धर्मों के अनुसार भगवान गणेश की प्रतिमाओं को कुंड या तालाब में विसर्जित किया जाता है| राजधानी रायपुर में जिला प्रशासन ने विसर्जन को ध्यान में रखकर एक गाइडलाइन 18 सितंबर की रात को जारी की है। जिसके मुताबिक, विसर्जन के दौरान 200 वाट के साउंड सिस्टम पर डीजे बजा सकेंगे। पंडाल के 100 मीटर के भीतर ही इसे बजाने की अनुमति होगी। विसर्जन के स्थल तक डीजे लेकर रैली या जुलूस की शक्ल में पहुंचने की अनुमति नहीं दी गई है। इससे पहले विसर्जन के मौके पर साउंड सिस्टम के इस्तेमाल पर जिला प्रशासन ने पूरी तरह से बैन लगा दिया था। धार्मिक संगठनों की मांग को ध्यान में रखकर कलेक्टर कार्यालय ने नया आदेश जारी कर 100 मीटर की परीधि में ही इसे बजाने की अनुमति दी है।

दूसरी तरफ नगर निगम विसर्जन कुंड भी बना रहा है। खारून नदी महादेवघाट में अस्थाई विसर्जन कुंड को तैयार किया गया है। यहां श्रद्धालु ने सपरिवार पहुंचकर घाट पर पूजा के बाद भगवान गणेश की प्रतिमाएं विसर्जित कर सकते हैं। नदी प्रदूषित न हो इसके लिए नगर निगम ने अलग से बंदोबस्त किया गया है। इसके अलावा रायपुर के हर जोन में तालाब या सार्वजनिक चौराहों पर नगर निगम के घरों की छोटी प्रतिमाओं के लिए अस्थाई कुंड रखवाया है, जहां लोग प्रतिमा विसर्जित कर सकेंगे।

19 को सुबह 6 बजे से 22 सितम्बर को दोपहर 2 बजे तक खारुन नदी तट पर बने कुंड में प्रतिमाएं विसर्जित हो सकेंगी। इस दौरान नगर निगम के लोगों की यहां ड्यूटी लगाई गई है। शहर के कई तालाबों के किनारे नगर निगम ने अस्थाई विसर्जन कुंड रखवाए हैं। खारुन तट पर लोगों की सुरक्षा के लिहाज से SDRF, पुलिस और जिला प्रशासन के अफसरों की टीम भी तैनात रहेगी।

राजधानी में विसर्जन के दौरान इन नियमों का करना होगा पालन

गणेश पंडाल के 100 मीटर की परिधि में 200 वॉट के साउंड सिस्टम पर डीजे, धुमाल या बैंड बजाया जा सकेगा। मूर्ति विसर्जन के दौरान प्रसाद, चरणामृत या कोई भी खाने-पीने की चीजें बांटी नहीं जाएंगी। मूर्ति विसर्जन के लिए एक से अधिक वाहन की अनुमति नहीं होगी। विसर्जन के लिए सिर्फ पिकअप, टाटा एस जैसे छोटे वाहनों का इस्तेमाल किया जाएगा। विसर्जन के लिए सिर्फ चार लोग ही जा सकेंगे, यह चारों उसी गाड़ी में होंगे जिस गाड़ी में मूर्ति होगी। किसी भी अतिरिक्त साज-सज्जा झांकी की अनुमति नहीं होगी। विसर्जन के लिए नगर निगम द्वारा तय किया गए रूट का ही इस्तेमाल करना होगा। शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों से मूर्ति विसर्जन के लिए वाहन ले जाने की अनुमति नहीं होगी, रिंगरोड का इस्तेमाल करना होगा।

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