कवर्धा विवाद: दुर्गेश देवांगन का नहीं है पता, सबसे पहले किया था “हिंदू ध्वज” उखाड़ने जाने का विरोध, मुस्लिम भीड़ ने घेरकर की थी मारपीट

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कवर्धा| छत्तीसगढ़ के कवर्धा में मुस्लिम भीड़ ने ‘हिन्दू ध्वज’ को उखाड़ फेंका था। इसका विरोध करने पर दुर्गेश देवांगन की जमकर पिटाई की गई थी। मीडिया रिपोर्टों की माने तो दुर्गेश का अब भी पता नहीं है। इस मामले में अब तक 29 गिरफ्तारियाँ हुई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इन्हीं आरोपितों की गिरफ्तारी को लेकर विहिप ने प्रदर्शन किया था, जिसके बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ने बाहर से लोगों को लाकर हिंसा भड़काने का आरोप हिन्दू संगठनों पर लगाया था। इस मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस पर एकपक्षीय कार्रवाई और हिंदुओं को निशाना बनाने के आरोप भी शुरू से लगते रहे हैं।

मिली जानकारी मुताबिक, दुर्गेश के संबंध में जानकारी हासिल करने के लिए ऑपइंडिया नामक मिडिया संस्था ने कई बार कवर्धा पुलिस से संपर्क किया। लेकिन हर बार पुलिस अधिकारी इस सवाल का जवाब देने से बचते रहे। ऐसे में सीधा सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर दुर्गेश देवांगन कहाँ हैं? छत्तीसगढ़ पुलिस आखिर क्या छिपाना चाह रही है? उल्लेखनीय है कि इस पूरे प्रकरण में स्थानीय विधायक और छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री मोहम्मद अकबर पर भी दंगाइयों को बचाने के आरोप लग रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार दुर्गेश की पिटाई सिटी कोतवाली के लोहारा नाका पर हुई थी। घटना 3 अक्टूबर की है। दुर्गेश ने हिंदू ध्वज हटाने और उसे पैरों तले रौंदने का विरोध किया था। इसके बाद समुदाय विशेष के लोगों ने उसे जमकर पीटा था। इसी मामले में आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने 5 अक्टूबर को प्रदर्शन किया था। जिसके बाद प्रशासन ने हिंदू संगठनों को हिंसा का कसूरवार ठहराया था।

रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में अब तक 29 गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें मुख्य आरोपित रिजवान और सलमान भी हैं। सलमान के पास से एक धारदार चाकू बरामद किए जाने की भी खबर है। दो आरोपितों इदरीश खान और वज़ीर खान को मंगलवार (12 अक्टूबर 2021) को गिरफ्तार किया गया था। उससे पहले सोमवार को 11 आरोपित गिरफ्तार किए गए थे। 16 अन्य की गिरफ्तारी इससे पहले ही हो चुकी थी। पुलिस ने इन आरोपितों की पहचान टेक्निकल एविडेंस, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, सीसीटीवी फुटेज आदि के माध्यम से की है।

जो गिरफ्तार हुए हैं उनके नाम हैं: सैय्यद महफूज अली, फैजल खान, नासिर खान, सैफ अली खान, सरफराज खान, साजिद अली, रियाज हिंगोरा, अयाज खान, शोहित खान, मोहम्मद इजरायल, शाहिद खान, सादिक कुरैशी, मोहम्मद खान, मोहम्मद इमरान, तौफीक मोहम्मद, सैयद महबूब, रेहान वगैरह। सारे गिरफ्तार आरोपित एक ही समुदाय के हैं। इन सभी पर अपराध संख्या 801/2021 के तहत कवर्धा में भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 294 295. 323, 506 B IPC, अपराध संख्या 802/21 के तहत धारा 294, 336, 147 IPC, अपराध संख्या 804/21 के तहत धारा 147, 148, 353, 332, 153-ए, 427, 295 IPC, 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज हैं। इन सभी पर लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धारा 3 भी लगाई गई है।

दुर्गेश पर हुए हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल भी हुआ था।

इस घटना के बाद दुर्गेश के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। दुर्गेश के परिजन किसी अनहोनी की आशंका से परेशान हैं। उनका कहना है कि पुलिस दुर्गेश को अपने वाहन में बिठा कर ले गई थी। उधर कवर्धा पुलिस ने दुर्गेश के अपनी कस्टडी में होने से इनकार किया है। दुर्गेश कवर्धा के वार्ड नंबर 27 में रहते थे। गत रविवार (10 अक्टूबर 2021) को जिले के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में निकाली गई सद्भावना रैली जब दुर्गेश के वार्ड में पहुँची तब भी उनकी माँ और बहन ने अधिकारियों से दुर्गेश को खोजने की अपील की थी। दुर्गेश परिवार का इकलौता लड़का है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दुर्गेश के लापता होने पर अधिकारियों का कहना है कि उन्हें दुर्गेश के बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार दुर्गेश की तलाश की जा रही है। आम लोगों से भी उन्होंने इस मामले में प्रशासन की मदद करने की अपील की है।

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने पिछले दिनों दुर्गेश के घर जा कर उनके परिजनों से मुलाकात की थी। रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान दुर्गेश की माँ ने कहा था कि घटना के बाद उनके बेटे को पुलिस वाले गाड़ी में ले गए थे। इसके बाद से उनका बेटा गायब है। पूर्व मुख्यमंत्री ने उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।

रमन सिंह ने इस मामले में कॉन्ग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण की नीति अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा था कि मंत्री के दबाव में प्रशासन ने अब तक 100 से अधिक लोगों को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से गिरफ्तार किया है। पूरे प्रकरण की न्यायिक जाँच की माँग करते हुए उन्होंने 11 अक्टूबर को दुर्ग सेंट्रल जेल पहुँच उन लोगों से मुलाकात भी की थी, जिन्हें फँसाने का आरोप प्रशासन पर लग रहा है।

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