झारखंड के नर्तक दलों ने दूसरे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का पहला पुरस्कार जीता है। रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विजेता नर्तक दलों को पांच-पांच लाख रुपए की पुरस्कार राशि, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया।

झारखंड के करसा नृत्य को विवाह के अवसर पर किए जाने वाले नृत्य श्रेणी में पहला स्थान मिला। इस श्रेणी में दूसरा पुरस्कार ओडिशा के धप नृत्य को मिला। तीसरा पुरस्कार असम के कारबी तिवा नर्तक दल को मिला। पारंपरिक त्योहारों में किए जाने वाले नृत्य की श्रेणी में झारखंड के छाऊ नृत्य दल ने पहला स्थान पाया।

ओडिशा के बाजसल नर्तकों को दूसरा और छत्तीसगढ़ के गौरसिंग नर्तक दल को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। पुरस्कार के तौर पर पहले स्थान पर आई टीमों को पांच-पांच लाख रुपए, दूसरे स्थान पर रहीं टीमों को तीन-तीन लाख रुपए और तीसरे स्थान पर रहीं टीमों को दो-दो लाख रुपए का चेक प्रदान किया गया।

पुरस्कार समारोह के बाद पहले स्थान पर रहीं झारखंड की दोनों टीमों ने अपनी विशेष प्रस्तुति दी। इसमें कलाकारों ने छाऊ शैली में महिषासुर मर्दिनी प्रसंग प्रस्तुत कर पूरे पांडाल को भक्ति और रोमांच से भर दिया। नृत्य में युद्ध कला का प्रदर्शन ऐसा था कि लोग एक-एक दृश्य पर तालियां बजाते रहे।

मुख्यमंत्री बोले-आदिवासी संस्कृति के बिना अस्तित्व अधूरा


समापन समारोह में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, आदिवासी संस्कृति, आदि दर्शन है। इसको आत्मसात करना होगा। इसको साथ लेकर आगे बढ़ना होगा। इसके बिना हमारा अस्तित्व पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, यहां गीत-संगीत, नृत्य और वादन के जरिए एक नया समाज आकार लेता दिखाई दे रहा है। यह वह समाज है जो लंबे समय तक हाशिए पर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा, इस आयोजन के जरिए हम सबने जनजातीय समाज की विविधता के दर्शन किए। यह भी देखा और महसूस किया कि इनकी विविधता में भी कितनी समानता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इनकी कलाओं में एकरूपता है, क्योंकि यह प्रकृति से प्रेरणा लेते हैं।

भक्त चरण दास थे समारोह के मुख्य अतिथि


पूर्व केंद्रीय मंत्री भक्तचरण दास समापन समारोह के मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा, छत्तीसगढ़ देश और दुनिया में अपने प्राकृतिक संसाधनों एवं मानव संसाधन की बदौलत महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ के विकास और यहां के लोगों की खुशहाली के लिए असंभव कार्यों को भी इस सरकार ने संभव कर दिखाया है। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और आदिवासी जनजीवन को सहेजने और संवारने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की।

समापन समारोह के मंच पर संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, आदिमजाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गुरू रूद्रकुमार, महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेंड़िया, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री उमेश पटेल, सांसद दीपक बैज, फूलो देवी नेताम, छाया वर्मा, युगाण्डा की हेड ऑफ मिशन ग्रेस अकेलो और नाईजीरिया के इकॉनामिक ट्रेड एवं इंवेस्टमेंट मिनिस्टर युसुफ सदाउके कबीरो आदि मौजूद रहे।

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