पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ जारी तनातनी के बीच भारतीय सेना (India Army) के शीर्ष कमांडर सोमवार को बैठक करेंगे. आज से शुरू हो रहे चार दिनों के कमांडर सम्मेलन में पूर्वी लद्दाख और चीन के साथ LAC से लगे संवेदनशील क्षेत्रों समेत देश की सुरक्षा चुनौतियों पर गहन समीक्षा की जाएगी. चार दिवसीय इस बैठक में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति पर भी चर्चा होने की उम्मीद है. एक अधिकारी ने बताया कि सैन्य कमांडर जम्मू कश्मीर में आम नागरिकों की हत्या की घटनाओं को लेकर केंद्र शासित प्रदेश के सुरक्षा हालात पर भी विचार-विमर्श करेंगे.

सेना कमांडरों के इस सम्मेलन का आयोजन 25-28 अक्टूबर तक नई दिल्ली में किया जाएगा. अधिकारियों ने बताया कि थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे (General MM Naravane) और शीर्ष कमांडर पूर्वी लद्दाख में देश की लड़ाकू तैयारियों की भी समीक्षा करेंगे, जहां भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच 17 महीने से गतिरोध की स्थिति बनी हुई है. हालांकि दोनों पक्षों ने टकराव के कई बिंदुओं से सैनिकों की पूरी तरह वापसी कर ली है. अधिकारियों ने कहा कि सैन्य कमांडर अफगानिस्तान पर तालिबान के नियंत्रण के भारत और क्षेत्र की सुरक्षा पर संभावित असर पर भी चर्चा कर सकते हैं.

25 से 28 अक्टूबर तक नई दिल्ली में आयोजित होगा सम्मेलन

सेना ने एक बयान में कहा, ‘2021 का दूसरा सैन्य कमांडर सम्मेलन 25 से 28 अक्टूबर तक नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा. सेना के कमांडरों का सम्मेलन शीर्ष स्तरीय आयोजन है जो साल में दो बार अप्रैल और अक्टूबर में आयोजित किया जाता है.’ सेना ने कहा, ‘भारतीय सेना का शीर्ष नेतृत्व मौजूदा और उभरते सुरक्षा और प्रशासनिक पहलुओं पर मंथन करेगा ताकि सीमा के हालात और कोविड-19 महामारी की चुनौतियों की पृष्ठभूमि में भारतीय सेना की भविष्य की कार्रवाई तय हो सके.’ बता दें कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सेना के शीर्ष कमांडरों के साथ संवाद करेंगे.

प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (CDS) जनरल बिपिन रावत, नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह और वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी भी तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को बढ़ावा देने के विकल्पों पर भारतीय सेना के शीर्ष पदाधिकारियों को संबोधित कर सकते हैं. गौरतलब है कि पिछले साल 5 मई को गतिरोध शुरू होने के बाद दोनों देश 13 दौर की सैन्य वार्ता कर चुके हैं, जिनका उद्देश्य टकराव के बिंदुओं से सैनिकों की वापसी और तनाव कम करना है. दोनों पक्षों ने कई दौर की सैन्य और राजनयिक वार्ता के बाद इस साल फरवरी में पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया पूरी की थी.

By Desk

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